सिंधु सभ्यता का राजनीतिक और सामाजिक संगठन—हम क्या जानते हैं?
सिंधु सभ्यता का राजनीतिक और सामाजिक संगठन—हम क्या जानते हैं?
सिंधु सभ्यता में योजनाबद्ध नगर, एक जैसे बाट और ईंटें, दूर तक फैला व्यापार और सार्वजनिक निर्माण दिखाई देते हैं। इससे मजबूत संगठन का पता चलता है, लेकिन कोई निश्चित राजा, राजवंश या राजमहल नहीं मिला है। इसलिए हड़प्पाई शासन की सही व्यवस्था आज भी एक पहेली है।
Quick Summary
सिंधु सभ्यता में योजनाबद्ध नगर, एक जैसे बाट और ईंटें, दूर तक फैला व्यापार और सार्वजनिक निर्माण दिखाई देते हैं। इससे मजबूत संगठन का पता चलता है, लेकिन कोई निश्चित राजा, राजवंश या राजमहल नहीं मिला है। इसलिए हड़प्पाई शासन की सही व्यवस्था आज भी एक पहेली है।
☷ Table of Contents ⌃
- 1🏛️ आखिर हड़प्पा सभ्यता पर शासन कौन करता था?
- 2🧩 संगठन साफ दिखता है, सरकार नहीं
- 3🏙️ इतने व्यवस्थित शहर अपने-आप नहीं बनते
- 4🧱 हजारों किलोमीटर दूर तक एक जैसे ईंटों के अनुपात
- 5⚖️ बाट भी यही कहानी बताते हैं
- 6👑 फिर राजा कहाँ हैं?
- 7🧔 फिर यह 'Priest-King' कौन है?
- 8🏰 राजमहल कहाँ है?
- 9⚱️ विशाल शाही कब्रें भी नहीं मिलीं
- 10💰 क्या हड़प्पाई समाज में सभी बराबर थे?
- 11🏠 मकानों का आकार क्या बताता है?
- 12💎 महँगी वस्तुएँ किसके पास थीं?
- 13⚒️ समाज में अलग-अलग काम करने वाले लोग
- 14🌾 किसान थे पूरी व्यवस्था की नींव
- 15🚚 व्यापारी दूर-दूर के क्षेत्रों को जोड़ते थे
- 16🏢 क्या एक Central Government थी?
- 17🗺️ एक विशाल साम्राज्य या जुड़े हुए कई क्षेत्र?
- 18📦 क्या हड़प्पाई लोग Tax देते थे?
- 19🛠️ शहर की नालियाँ साफ कौन करता था?
- 20🪖 सेना और युद्ध के बारे में क्या पता है?
- 21👥 हड़प्पाई समाज की एक संभावित तस्वीर
- 22🔍 सिंधु लिपि पढ़ना इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
- 23🧠 Evidence और Interpretation ऐसे समझें
- 24⚠️ परीक्षा में होने वाली आम गलतियाँ
- 25🎯 10 सेकंड में Revision
- 26📌 सबसे जरूरी बात
🏛️ आखिर हड़प्पा सभ्यता पर शासन कौन करता था?
सवाल बहुत सीधा है, लेकिन इसका जवाब सिंधु सभ्यता की सबसे बड़ी पहेलियों में से एक है।
हड़प्पाई लोगों ने बड़े शहर बनाए, नालियों की व्यवस्था चलाई, एक जैसे अनुपात की ईंटें बनाईं, तय माप के बाट इस्तेमाल किए, बड़े स्तर पर कारीगरी की और दूर-दूर तक व्यापार किया।
इतना सब बिना किसी व्यवस्था के होना मुश्किल है। यानी हड़प्पाई समाज में मजबूत संगठन जरूर था।
लेकिन समस्या यह है कि हमें नहीं पता कि उस व्यवस्था को चलाता कौन था।
कोई हड़प्पाई राजा निश्चित रूप से पहचाना नहीं गया है। कोई पढ़ा जा सकने वाला राजकीय लेख नहीं है। कोई निश्चित राजवंश ज्ञात नहीं है और कोई इमारत पक्के तौर पर राजा का महल नहीं मानी गई है।
🧩 संगठन साफ दिखता है, सरकार नहीं
इसे बहुत आसान तरीके से समझिए।
हमें क्या मिला? एक जैसी ईंटें, योजनाबद्ध सड़कें, नालियाँ और मानकीकृत बाट।
इससे क्या लगता है? कुछ संस्थाएँ या लोग साझा नियमों को लागू या बनाए रखते होंगे।
हमें क्या नहीं पता? वे लोग राजा थे, व्यापारियों का समूह था, स्थानीय प्रमुख थे, कोई परिषद थी या कई समूह मिलकर व्यवस्था चलाते थे।
यही हड़प्पाई राजनीति की असली समस्या है।
🏙️ इतने व्यवस्थित शहर अपने-आप नहीं बनते

हड़प्पा और मोहनजोदड़ो जैसे शहर बिना योजना के बने मकानों का ढेर नहीं थे। सड़कें एक व्यवस्था में थीं, कई मकानों की नालियाँ बड़ी नालियों से जुड़ती थीं और निर्माण में तय प्रकार की ईंटों का इस्तेमाल होता था।
इससे लगता है कि शहर के स्तर पर फैसले लेने और काम करवाने की कोई व्यवस्था थी।
सड़क कहाँ बनेगी? नाली कहाँ जाएगी? सार्वजनिक निर्माण के लिए मजदूर और सामग्री कहाँ से आएगी? ऐसी चीजों के लिए किसी स्तर पर coordination जरूरी था।
लेकिन पुरातत्व हमें यह नहीं बताता कि ये फैसले राजा, परिषद, स्थानीय अधिकारियों या किसी दूसरे समूह द्वारा लिए जाते थे।
🧱 हजारों किलोमीटर दूर तक एक जैसे ईंटों के अनुपात
हड़प्पाई सभ्यता की खास विशेषता ईंटों का मानकीकरण था। कई जगह पकी ईंटों में लगभग 1:2:4 यानी मोटाई : चौड़ाई : लंबाई का अनुपात मिलता है।
इतनी दूर-दूर की बस्तियों में समान निर्माण परंपरा मिलना बताता है कि हड़प्पाई दुनिया में साझा नियम और तकनीकी परंपराएँ थीं।
लेकिन यहाँ एक गलती नहीं करनी चाहिए: एक जैसी ईंटें = एक ही सम्राट, यह जरूरी नहीं है।
साझा तकनीक व्यापार, कारीगरों के संपर्क, प्रशिक्षण और लंबे समय से चली आ रही परंपरा से भी फैल सकती है।
⚖️ बाट भी यही कहानी बताते हैं
हड़प्पाई पत्थर के बाट निश्चित क्रम में बनाए जाते थे। अलग-अलग शहरों में समान वजन-प्रणाली व्यापार को आसान बनाती होगी।
मान लीजिए लोथल का व्यापारी किसी दूसरे हड़प्पाई नगर में माल बेच रहा है। अगर दोनों जगह वजन की व्यवस्था समान है, तो लेन-देन ज्यादा आसान हो जाता है।
इससे साझा आर्थिक नियम दिखाई देते हैं। लेकिन बाट हमें यह नहीं बताते कि इन नियमों को लागू करने वाला राजा था या कोई दूसरी संस्था।
👑 फिर राजा कहाँ हैं?
यही सबसे दिलचस्प बात है।
मिस्र में फिरौन ने विशाल पिरामिड और अपने नाम वाले लेख छोड़े। मेसोपोटामिया में राजाओं के नाम, युद्ध और कानून मिलते हैं।
लेकिन हड़प्पाई दुनिया में अभी तक हमें:
- किसी निश्चित राजा का नाम नहीं मिला,
- कोई पढ़ा जा सकने वाला royal inscription नहीं मिला,
- कोई निश्चित राजवंश ज्ञात नहीं है,
- विशाल शाही मकबरा नहीं मिला,
- और कोई इमारत पक्के तौर पर राजमहल साबित नहीं हुई।
इसका मतलब यह नहीं कि वहाँ राजा हो ही नहीं सकते थे। इसका मतलब केवल इतना है कि हमारे पास अभी राजा होने का स्पष्ट प्रमाण नहीं है।
🧔 फिर यह 'Priest-King' कौन है?
मोहनजोदड़ो से दाढ़ी वाले एक व्यक्ति की प्रसिद्ध पत्थर की मूर्ति मिली है। उसके कपड़े पर सुंदर डिजाइन है। उसे आम तौर पर 'Priest-King' कहा जाता है।
नाम सुनकर ऐसा लगता है जैसे हमें उसका पद पता है। लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है।
उस मूर्ति पर कोई पढ़ा जा सकने वाला लेख नहीं है जो बताए कि वह व्यक्ति कौन था। हमें उसका नाम तक नहीं पता।
इसलिए याद रखें: 'Priest-King' आधुनिक पुरातत्वविदों द्वारा दिया गया nickname है। उसके पुजारी या राजा होने का प्रमाण नहीं है।
🏰 राजमहल कहाँ है?
हड़प्पाई नगरों में कई बड़ी इमारतें मिली हैं, लेकिन किसी को निश्चित रूप से राजमहल नहीं कहा जा सकता।
सिर्फ बड़ी इमारत देखकर उसे राजा का महल मान लेना सही नहीं होगा। वह प्रशासनिक, सामुदायिक, भंडारण या किसी दूसरे काम के लिए भी हो सकती थी।
जब तक हमारे पास लिखित प्रमाण नहीं है, इमारत के असली उपयोग के बारे में सावधानी जरूरी है।
⚱️ विशाल शाही कब्रें भी नहीं मिलीं
हड़प्पाई कब्रिस्तानों में मृतकों के साथ मिट्टी के बर्तन, आभूषण और दूसरी चीजें मिली हैं। लेकिन मिस्र के पिरामिड जैसी विशाल शाही कब्रें नहीं मिली हैं।
इसका मतलब यह हो सकता है कि हड़प्पाई शक्तिशाली लोग अपनी ताकत दिखाने के लिए विशाल कब्रें नहीं बनाते थे।
लेकिन इससे यह पक्का नहीं कहा जा सकता कि वहाँ कोई अमीर या शक्तिशाली वर्ग था ही नहीं।
💰 क्या हड़प्पाई समाज में सभी बराबर थे?
नहीं, ऐसा मानना भी सही नहीं होगा।
मकानों के आकार, कीमती वस्तुओं और आभूषणों के वितरण में अंतर मिलता है। कुछ घर छोटे थे तो कुछ काफी बड़े। कुछ लोगों के पास दुर्लभ और महँगी वस्तुओं तक ज्यादा पहुँच रही होगी।
इससे पता चलता है कि समाज में किसी न किसी रूप में आर्थिक और सामाजिक अंतर मौजूद थे।
लेकिन यह अंतर बाद की किसी निश्चित caste या class व्यवस्था जैसा था, ऐसा कहना हमारे प्रमाण से आगे जाना होगा।
🏠 मकानों का आकार क्या बताता है?
हड़प्पाई नगरों में हर घर एक जैसा नहीं था। कुछ घरों में कम कमरे थे, जबकि कुछ बड़े घरों में कई कमरे और आँगन थे।
बड़ा मकान अपने-आप यह सिद्ध नहीं करता कि उसमें राजा रहता था। लेकिन इससे परिवार की संपन्नता, आकार या सामाजिक स्थिति का कुछ अंदाजा मिल सकता है।
इसीलिए पुरातत्वविद सामाजिक अंतर समझने के लिए मकानों की तुलना भी करते हैं।
💎 महँगी वस्तुएँ किसके पास थीं?
सोने के आभूषण, सुंदर पत्थरों के मनके और बहुत मेहनत से बनी चीजें हर व्यक्ति के लिए समान रूप से उपलब्ध नहीं रही होंगी।
ऐसी वस्तुएँ बनाने के लिए महँगा कच्चा माल और कुशल कारीगर दोनों चाहिए थे।
अगर कुछ घरों या कब्रों में ऐसी वस्तुएँ ज्यादा मिलती हैं, तो यह धन और प्रतिष्ठा में अंतर का संकेत हो सकता है।
लेकिन याद रखें: अमीर व्यक्ति होना और राजनीतिक शासक होना एक ही बात नहीं है।
⚒️ समाज में अलग-अलग काम करने वाले लोग
हड़प्पाई समाज में बहुत तरह के काम होते थे। कोई मनके बनाता था, कोई मिट्टी के बर्तन, कोई धातु का काम करता था और कोई शंख से वस्तुएँ बनाता था।
चन्हुदड़ो जैसे स्थल विशेष कारीगरी के महत्वपूर्ण केंद्र थे।
इससे लगता है कि समाज में किसान, पशुपालक, कारीगर, व्यापारी, निर्माण करने वाले लोग और संभवतः प्रशासन से जुड़े लोग अलग-अलग भूमिकाएँ निभाते थे।
🌾 किसान थे पूरी व्यवस्था की नींव
मोहनजोदड़ो जैसा बड़ा शहर भी बिना भोजन के नहीं चल सकता था।
शहरों में रहने वाले हजारों लोगों के लिए अनाज, पशु और दूसरी खाद्य सामग्री आसपास के गाँवों और ग्रामीण क्षेत्रों से आती होगी।
इसलिए हड़प्पाई दुनिया को केवल शहरों की सभ्यता समझना अधूरा होगा। गाँव और शहर एक-दूसरे पर निर्भर थे।
🚚 व्यापारी दूर-दूर के क्षेत्रों को जोड़ते थे
कार्नेलियन, शंख, ताँबा और दूसरी सामग्री अपने प्राकृतिक स्रोतों से शिल्प-केंद्रों और शहरों तक पहुँचती थी।
हड़प्पाई वस्तुएँ फारस की खाड़ी और मेसोपोटामिया तक भी पहुँचीं।
इससे व्यापार और सामान की आवाजाही संभालने वाले लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही होगी।
लेकिन हम किसी निश्चित 'merchant class' का नाम या उसका राजनीतिक अधिकार नहीं बता सकते, क्योंकि हड़प्पाई लिखित स्रोत अभी पढ़े नहीं जा सकते।
🏢 क्या एक Central Government थी?
इस सवाल का पक्का जवाब अभी हमारे पास नहीं है।
एक विचार यह है कि इतनी समान ईंटें, बाट और नगर व्यवस्था के पीछे कोई मजबूत केंद्रीय सत्ता रही होगी।
दूसरा विचार है कि अलग-अलग शहरों की अपनी स्थानीय सरकारें हो सकती थीं, लेकिन वे एक जैसी सांस्कृतिक और व्यापारिक परंपराएँ मानते थे।
यह भी संभव है कि सत्ता एक राजा के बजाय कई शक्तिशाली समूहों या संस्थाओं में बँटी हुई हो।
इनमें से किसी एक model को अभी निश्चित रूप से सिद्ध नहीं किया जा सका है।
🗺️ एक विशाल साम्राज्य या जुड़े हुए कई क्षेत्र?
हड़प्पा सभ्यता बहुत बड़े क्षेत्र में फैली थी। बड़े शहरों के साथ सैकड़ों छोटे कस्बे और गाँव भी थे।
इनमें कई समानताएँ थीं, लेकिन स्थानीय अंतर भी थे—जैसे बर्तनों की शैली, उपलब्ध कच्चा माल और बस्तियों का रूप।
इसलिए पूरे हड़प्पाई क्षेत्र को एक राजधानी से चलने वाला एक ही साम्राज्य कहना अभी प्रमाण से आगे की बात होगी।
अधिक सुरक्षित समझ यह है कि यह साझा परंपराओं और व्यापार से जुड़ी एक विशाल दुनिया थी, जिसमें क्षेत्रीय अंतर भी मौजूद थे।
📦 क्या हड़प्पाई लोग Tax देते थे?
बड़े सार्वजनिक निर्माण, कारीगरों और शहरों को चलाने के लिए किसी रूप में अनाज, सामान या श्रम जुटाया जाता होगा।
यह किसी tax जैसी व्यवस्था से भी हो सकता था।
लेकिन हमारे पास कोई पढ़ा जा सकने वाला हड़प्पाई tax record नहीं है। इसलिए यह बताना संभव नहीं कि कर कौन लेता था, कितना लिया जाता था या किस रूप में लिया जाता था।
🛠️ शहर की नालियाँ साफ कौन करता था?
यह छोटा सवाल असल में बहुत बड़ी बात बताता है।
हड़प्पाई शहरों में जुड़ी हुई drainage व्यवस्था थी। नालियाँ केवल बनानी ही नहीं थीं, उन्हें समय-समय पर साफ और मरम्मत भी करना पड़ता होगा।
इससे किसी प्रकार की सामूहिक नगर व्यवस्था का संकेत मिलता है।
लेकिन नालियाँ हमें उस अधिकारी का नाम नहीं बतातीं जो यह काम करवाता था। यही हड़प्पाई राजनीति की समस्या है—व्यवस्था दिखाई देती है, उसे चलाने वाले लोग नहीं।
🪖 सेना और युद्ध के बारे में क्या पता है?
भाले की नोक, तीर और धारदार औजार जैसी वस्तुएँ मिली हैं, लेकिन हड़प्पाई कला में युद्ध और सैनिक राजाओं का प्रदर्शन कुछ दूसरी प्राचीन सभ्यताओं जैसा प्रमुख नहीं है।
ऐसे बड़े विजय-दृश्य नहीं मिले हैं जिनमें कोई हड़प्पाई राजा दुश्मनों को हराता दिख रहा हो।
इसका मतलब यह नहीं कि युद्ध कभी हुआ ही नहीं। बस इतना कहा जा सकता है कि हड़प्पाई पुरातात्विक प्रमाणों में सैन्य सत्ता का प्रदर्शन बहुत स्पष्ट नहीं है।
👥 हड़प्पाई समाज की एक संभावित तस्वीर
पुरातात्विक प्रमाणों के आधार पर समाज में संभवतः:
- किसान और पशुपालक,
- विशेष कारीगर,
- व्यापारी और सामान पहुँचाने वाले लोग,
- निर्माण और श्रम करने वाले लोग,
- अधिक धन या प्रतिष्ठित वस्तुओं तक पहुँच रखने वाले लोग,
- और संभवतः प्रशासन या सामूहिक निर्णय से जुड़े लोग थे।
लेकिन इनके आधार पर कोई निश्चित caste system या कठोर सामाजिक वर्ग बना देना सही नहीं होगा।
🔍 सिंधु लिपि पढ़ना इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
अगर सिंधु लिपि कभी सही तरह पढ़ ली गई, तो संभव है कि मुहरों पर लोगों के नाम, पद, संस्थाओं या जगहों के नाम मिलें।
तब हड़प्पाई राजनीतिक व्यवस्था के बारे में हमारी समझ पूरी तरह बदल सकती है।
अभी हमें मकानों, नगर योजना, कारीगरी, व्यापार, बाट, मुहरों और संपत्ति के अंतर को देखकर समाज की तस्वीर बनानी पड़ती है।
🧠 Evidence और Interpretation ऐसे समझें
Evidence: एक जैसी ईंटें.
Interpretation: साझा निर्माण नियम या परंपरा.
Evidence: योजनाबद्ध सड़कें और नालियाँ.
Interpretation: नगर स्तर पर coordination.
Evidence: छोटे-बड़े घर और महँगी वस्तुओं का असमान वितरण.
Interpretation: कुछ सामाजिक और आर्थिक असमानता.
Evidence: निश्चित राजमहल या शाही कब्र नहीं मिली.
गलत निष्कर्ष: इसलिए कोई शासक था ही नहीं.
⚠️ परीक्षा में होने वाली आम गलतियाँ
- किसी हड़प्पाई राजा की पहचान निश्चित रूप से नहीं हुई है।
- Priest-King वास्तव में पुजारी-राजा था, यह सिद्ध नहीं है।
- कोई इमारत निश्चित रूप से हड़प्पाई राजमहल नहीं मानी गई है।
- मिस्र जैसी विशाल शाही कब्रें नहीं मिली हैं।
- एक जैसे बाट और ईंटें coordination दिखाते हैं, लेकिन अकेले उनसे एक केंद्रीकृत साम्राज्य सिद्ध नहीं होता।
- मकानों और महँगी वस्तुओं में अंतर सामाजिक असमानता का संकेत देता है।
- हड़प्पाई राजनीतिक व्यवस्था का सही रूप अभी अज्ञात है।
🎯 10 सेकंड में Revision
Political system: निश्चित नहीं.
King: कोई confirmed ruler नहीं.
Priest-King: modern nickname.
Organization: cities + drains + bricks + weights से साफ प्रमाण.
Society: अलग-अलग पेशे + कुछ सामाजिक असमानता.
Single empire: सिद्ध नहीं.
📌 सबसे जरूरी बात
हड़प्पाई राजनीति की सबसे दिलचस्प बात यह है कि व्यवस्था हर जगह दिखाई देती है, लेकिन उसे चलाने वाले लोग हमें दिखाई नहीं देते।
योजनाबद्ध शहर, नालियाँ, एक जैसी ईंटें, मानकीकृत बाट और विशाल व्यापारिक नेटवर्क बताते हैं कि coordination बहुत मजबूत था। फिर भी हमारे पास किसी निश्चित राजा, राजवंश या राजकीय लेख का प्रमाण नहीं है।
इसलिए सबसे सही निष्कर्ष है: सिंधु सभ्यता में मजबूत सामाजिक और प्रशासनिक संगठन था, लेकिन उसकी राजनीतिक सत्ता किस रूप में काम करती थी, यह आज भी निश्चित नहीं है।
Was this article helpful?
Help us improve by giving your feedback.
Test your understanding
योजनाबद्ध हड़प्पाई नगर सबसे स्पष्ट रूप से क्या बताते हैं?
- A. हर शहर पर एक ही ज्ञात सम्राट का शासन था
- B. काफी मजबूत संगठन और coordination मौजूद था
- C. हड़प्पाई लोगों के पास कोई प्रशासन नहीं था
- D. सभी मकान बिल्कुल एक जैसे थे
योजनाबद्ध सड़कें, नालियाँ और standardized निर्माण मजबूत coordination दिखाते हैं, हालांकि राजनीतिक सत्ता का सही रूप अज्ञात है।
'Priest-King' नाम भ्रामक क्यों हो सकता है?
- A. मूर्ति मिस्र की है
- B. आकृति वास्तव में महिला है
- C. उसके पुजारी या राजा होने का कोई निश्चित प्रमाण नहीं है
- D. ऐसी कोई मूर्ति मिली ही नहीं है
Priest-King आधुनिक nickname है। कोई पढ़ा जा सकने वाला लेख उस व्यक्ति की असली भूमिका नहीं बताता।
कौन-सा प्रमाण हड़प्पाई समाज में सामाजिक अंतर का संकेत देता है?
- A. मकानों के आकार और कीमती वस्तुओं तक पहुँच में अंतर
- B. हर व्यक्ति का बिल्कुल एक जैसा मकान
- C. हर कब्र में बिल्कुल समान संपत्ति
- D. लिखित जाति-सूची
मकानों के आकार और मूल्यवान वस्तुओं के वितरण में अंतर सामाजिक और आर्थिक असमानता का संकेत देता है।
हड़प्पाई ईंटों का मानकीकरण सबसे सुरक्षित रूप से क्या सिद्ध करता है?
- A. एक ज्ञात सम्राट ने हर शहर खुद design किया
- B. हर मकान सरकार का था
- C. कोई क्षेत्रीय अंतर नहीं था
- D. बहुत बड़े क्षेत्र में साझा निर्माण परंपराएँ मौजूद थीं
एक जैसे ईंट अनुपात साझा निर्माण परंपरा दिखाते हैं, लेकिन अकेले इससे एक centralized empire सिद्ध नहीं होता।
हड़प्पाई राजसत्ता के बारे में सबसे सही कथन कौन-सा है?
- A. हड़प्पाई राजाओं की पूरी सूची ज्ञात है
- B. पढ़े जा सकने वाले प्रमाण से किसी हड़प्पाई शासक की निश्चित पहचान नहीं हुई है
- C. Priest-King निश्चित रूप से मोहनजोदड़ो का राजा था
- D. हड़प्पाई राजकीय लेख कई युद्धों का वर्णन करते हैं
कोई securely deciphered royal inscription या confirmed Harappan king list ज्ञात नहीं है।
हड़प्पाई शहरी जीवन के भोजन की मूल नींव कौन थे?
- A. केवल पुजारी
- B. केवल विदेशी व्यापारी
- C. किसान और पशुपालक
- D. केवल मुहर बनाने वाले
शहरों की आबादी भोजन के लिए ग्रामीण क्षेत्रों के कृषि और पशुपालन उत्पादन पर निर्भर थी।
हड़प्पाई राजनीतिक संगठन के वर्तमान प्रमाणों से कौन-सा निष्कर्ष सबसे सही बैठता है?
- A. सभ्यता बहुत संगठित थी, लेकिन राजनीतिक सत्ता का सही रूप अभी निश्चित नहीं है
- B. यह सिद्ध है कि एक सम्राट हर बस्ती पर शासन करता था
- C. हड़प्पाई समाज में कोई राजनीतिक संगठन नहीं था
- D. हर शहर निश्चित रूप से स्वतंत्र लोकतंत्र था
नगर योजना और मानकीकरण मजबूत संगठन दिखाते हैं, लेकिन प्रमाण किसी एक निश्चित शासन-व्यवस्था को सिद्ध नहीं करते।
हड़प्पाई राजनीति समझने के लिए सिंधु लिपि का पढ़ा जाना इतना महत्वपूर्ण क्यों होगा?
- A. इससे हर मकान का सही रंग पता चलेगा
- B. इससे सिद्ध होगा कि हर मुहर राजा की थी
- C. फिर पुरातत्व की जरूरत नहीं रहेगी
- D. इससे नाम, पद, संस्थाएँ या प्रशासनिक जानकारी मिल सकती है
पढ़े जा सकने वाले inscriptions व्यक्तियों, पदों और संस्थाओं के बारे में ऐसा सीधा प्रमाण दे सकते हैं जिसे केवल पुरातत्व से पहचानना मुश्किल है।